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नक्षत्र: आज का पंचांग तिथि वार नक्षत्र और 27 चंद्र नक्षत्रों की गाइड

March 22, 2026·लेखक: Vadim Arkhipov
नक्षत्र
नक्षत्रपंचांगताराबलगंडांतमुहूर्त
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नक्षत्र वैदिक ज्योतिष का वह कैलेंडर-आधार है जो राशि-चक्र के 360° को 27 समान खंडों (प्रत्येक 13°20') में बाँटता है — चंद्रमा लगभग प्रतिदिन एक नक्षत्र पार करता है और पंचांग की दैनिक ऊर्जा निर्धारित करता है। जहाँ राशि परिस्थिति बताती है, वहीं नक्षत्र मन का वास्तविक अनुभव दर्शाता है। सात स्वभाव (मृदु, लघु, चर, स्थिर, उग्र, तीक्ष्ण, मिश्र) तय करते हैं कि किस नक्षत्र में विवाह, यात्रा, खरीदारी या चिकित्सा उचित है। व्यक्तिगत ताराबल जन्म नक्षत्र से नव-चक्र पर आधारित है — विपत् (3), प्रत्यक् (5) और वध (7) तारा पर बड़े निर्णय न लें। गंडांत (रेवती-अश्विनी, आश्लेषा-मघा, ज्येष्ठा-मूल) जल-अग्नि संधि के कार्मिक स्थान हैं जो शुभ कार्यों के लिए वर्जित हैं। कुंडली में नक्षत्र का पाद नवांश लग्न निर्धारित करता है जो विम्शोत्तरी दशा और विवाह-विश्लेषण की नींव है। अष्टकूट मिलान में नाड़ी, योनि और तारा दोष नक्षत्र पर ही आधारित हैं।

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विषय-सूची
  1. मुख्य बिंदु
  2. नक्षत्र क्या है? 13°20' का गणित
  3. पंचांग के पाँच अंग: नक्षत्र इसकी आत्मा क्यों है?
  4. नक्षत्रों के सात स्वभाव: कब क्या करें
  5. बाल-कटाई, शॉपिंग और सौन्दर्य: मृदु नक्षत्रों का व्यावहारिक उपयोग
  6. गंडांत: राशि-चक्र के कार्मिक उलझन-स्थान
  7. ताराबल: आपका व्यक्तिगत नक्षत्र-सूचकांक
  8. संबंधों के लिए नक्षत्र: पहली मुलाकात और मेल-मिलाप
  9. नवांश और पाद: जन्म-समय की सटीकता क्यों ज़रूरी है
  10. नक्षत्र देवता और उनका व्यावहारिक महत्त्व
  11. आज का नक्षत्र कैसे जानें: पंचांग पठन गाइड
  12. नक्षत्र कैलकुलेटर: अभी अपना जन्म नक्षत्र जानें
  13. गहराई से जानें: सम्बंधित लेख
पंचांग के पाँच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण — और हर एक क्या दर्शाता है
«पंच-अंग» का अर्थ है पाँच अंग। पाँचों एक ही दिन का वर्णन करते हैं और अलग-अलग गति से बदलते हैं — इसीलिए शुभ मुहूर्त कुछ घंटों की खिड़की होता है, पूरा दिन नहीं।

पंचांग में नक्षत्र: 27 चंद्र नक्षत्रों की गुप्त लय

हर दिन चंद्रमा एक नए तारे की शरण में प्रवेश करता है। यही 27 नक्षत्रों का नित्य परिभ्रमण पंचांग की आत्मा है — वह ज्योतिष-कैलेंडर जिसे सहस्राब्दियों से इस सरल किंतु गहन प्रश्न का उत्तर खोजने के लिए उपयोग किया जाता रहा है: क्या आज कार्य करने का सही समय है?

वैदिक ज्योतिष में राशि-चक्र केवल 12 राशियों में ही नहीं, बल्कि 27 नक्षत्रों में भी विभक्त है — प्रत्येक नक्षत्र ठीक 13°20' का होता है। आज जिस नक्षत्र में चंद्रमा है, वह पंचांग के किसी भी अन्य अंग से अधिक सटीक रूप से दिन का मनोवैज्ञानिक स्वभाव निर्धारित करता है।

इस लेख में जानेंगे: 27 नक्षत्रों का गणित, उनके सात स्वभाव, व्यक्तिगत ताराबल चक्र, गंडांत के कार्मिक संधि-स्थान, और प्रेम, खरीदारी, बाल कटवाने व कठिन बातचीत के लिए सही मुहूर्त कैसे चुनें।

मुख्य बिंदु

  • 27 नक्षत्र 13°20' के सटीक खंड हैं — चंद्रमा लगभग प्रतिदिन एक नक्षत्र पार करता है
  • नक्षत्र यह नहीं बताता कि परिस्थिति क्या है (वह राशि का काम है) — बल्कि यह बताता है कि मन उस परिस्थिति में कैसा अनुभव करता है
  • सात नक्षत्र-स्वभाव (मृदु, लघु, चर, स्थिर, उग्र, तीक्ष्ण, मिश्र) बताते हैं कि किस प्रकार के दिन क्या कार्य उचित है
  • आपकी व्यक्तिगत ताराबल — जन्म नक्षत्र से शुरू 9-चरण चक्र — जोखिम और उपलब्धि के दिन पूर्वसूचित करती है
  • गंडांत (जल-अग्नि राशि संधि) कार्मिक पुनर्स्थापना है, अभिशाप नहीं
  • मृदु नक्षत्र — मृगशिरा, चित्रा, अनुराधा, रेवती — प्रेम, सौन्दर्य और शॉपिंग के लिए आदर्श
  • StarMeet के निःशुल्क कैलकुलेटर से तुरंत जन्म नक्षत्र जानें

नक्षत्र क्या है? 13°20' का गणित

नक्षत्र (संस्कृत: नक्षत्र — "चंद्र मंदिर") 360° राशि-चक्र के 27 समान खंडों में से एक है। प्रत्येक खंड ठीक 13 अंश 20 कला (800 कला) का होता है — और यही वह दूरी है जो चंद्रमा औसतन एक दिन में तय करता है। इससे एक प्राकृतिक कैलेंडर बनता है: एक नक्षत्र, एक दिन, एक भावनात्मक स्वभाव।

वैदिक ज्योतिष निरयण (सायन-रहित) राशि-चक्र का उपयोग करता है जो स्थिर तारों से बद्ध है — पश्चिमी सायन राशि-चक्र के विपरीत जो विषुव के साथ खिसकती है। दोनों के अंतर को अयनांश (लाहिरी अनुसार 2026 में ~23°51') कहते हैं, जो सभी नक्षत्र गणनाओं में लागू किया जाता है।

27 नक्षत्रों, उनके ग्रह-स्वामियों और विंशोत्तरी दशा प्रणाली का क्रमबद्ध वर्गीकरण महर्षि पराशर ने बृहत् पराशर होरा शास्त्र (BPHS) में किया — जो शास्त्रीय ज्योतिष का सर्वोच्च प्रमाण है।

27 बनाम 28वाँ नक्षत्र

शास्त्रों में एक 28वें अंतर-कालिक नक्षत्र अभिजित का उल्लेख है — यह 276°40' से 280°53' तक विस्तृत है और उत्तराषाढ़ा के अंतिम चरण व श्रवण के प्रारंभ को स्पर्श करता है। किंतु मानक विंशोत्तरी दशा और दैनिक पंचांग के लिए 27-नक्षत्र प्रणाली ही प्रमाणिक है। अभिजित एक "आपातकालीन मुहूर्त" है — प्रतिदिन दोपहर के सूर्य के आसपास ~48 मिनट, जब कोई अन्य शुभ नक्षत्र न हो।


पंचांग के पाँच अंग: नक्षत्र इसकी आत्मा क्यों है?

"पंचांग" का अर्थ है "पाँच अंग": तिथि (चंद्र कला), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र (चंद्र का तारा), योग (सूर्य-चंद्र का कोणीय संबंध) और करण (तिथि का आधा भाग)। प्रत्येक एक तत्त्व को नियंत्रित करता है।

यदि तिथि जल तत्त्व (भावना) पर शासन करती है और वार अग्नि तत्त्व (क्रिया-ऊर्जा) पर, तो नक्षत्र वायु और आकाश तत्त्व पर शासन करता है — अर्थात् दिन का प्रत्यक्ष मनोवैज्ञानिक अनुभव।

पराशर BPHS में स्पष्ट करते हैं कि चंद्रमा = मनस् (मन, इंद्रिय-बोध)। इसका तात्पर्य:

  • राशि = परिस्थिति या वातावरण
  • नक्षत्र = उस वातावरण में मन कैसा अनुभव करता है

उदाहरण: वृश्चिक राशि में चंद्रमा तीव्र वातावरण संकेत करता है — परंतु यदि चंद्रमा अनुराधा नक्षत्र में हो (शनि-शासित), तो मन बाहरी उथल-पुथल के बावजूद समर्पण, निष्ठा और कर्तव्यबोध व्यक्त करता है। यही कारण है कि मुहूर्त में नक्षत्र का महत्त्व राशि से अधिक होता है।


नक्षत्रों के सात स्वभाव: कब क्या करें

बी.वी. रमण की "मुहूर्त: शुभ काल की ज्योतिष" में 27 नक्षत्रों को सात स्वभाव (गण) में विभक्त किया गया है:

स्वभावसंस्कृतनक्षत्रश्रेष्ठ कार्य
स्थिरsthiraरोहिणी, उत्तर फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, उत्तरभाद्रपदविवाह, नींव, दीर्घकालिक कार्य
चरcalaश्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, पुनर्वसु, स्वातीवाहन-क्रय, यात्रा, नई शुरुआत
उग्रugraपूर्व फाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा, पूर्वभाद्रपद, भरणी, मघाकेवल विध्वंसात्मक कार्यों के लिए
तीक्ष्णtikṣṇaमूल, ज्येष्ठा, आर्द्रा, आश्लेषाजबरन अलगाव, शल्यक्रिया
मृदुmṛduचित्रा, अनुराधा, मृगशिरा, रेवतीप्रेम, सौन्दर्य, नए वस्त्र, कला, मेल-मिलाप
लघुlaghuअश्विनी, पुष्य, हस्त, अभिजितआभूषण, खेल, चिकित्सा, लघु यात्रा
साधारण/मिश्रsādhāraṇaकृत्तिका, विशाखासाधारण दैनिक कार्य

बृहत् पराशर होरा शास्त्र के अनुसार नक्षत्र का स्वभाव (गण) न केवल दिन की ऊर्जा निर्धारित करता है, बल्कि उस समय आरम्भ किए गए उद्यम का दीर्घकालिक भाग्य भी तय करता है।

पुष्य — सर्वश्रेष्ठ नक्षत्र

सभी 27 नक्षत्रों में पुष्य (स्वामी: बृहस्पति) विशेष स्थान रखता है। बी.वी. रमण इसे "28 नक्षत्रों में सबसे अधिक शुभकारी" कहते हैं — इसकी पवित्रता अन्य अशुभ योगों से उत्पन्न लगभग सभी दोषों को निष्प्रभावी कर देती है।


बाल-कटाई, शॉपिंग और सौन्दर्य: मृदु नक्षत्रों का व्यावहारिक उपयोग

कभी ध्यान दिया है कि एक दिन कटे बाल सुंदर बढ़ते हैं और दूसरे दिन परिणाम निराशाजनक होता है? यह संयोग नहीं है। शास्त्रीय ग्रंथ मृदु और लघु नक्षत्रों को सौन्दर्य-कार्यों के लिए स्पष्ट रूप से विहित करते हैं:

  • मृगशिरा (चंद्र-शासित) — कोमल, जिज्ञासु, पुनर्जीवनदायी। बाल-कटाई, सौन्दर्य उपचार, नए वस्त्र के लिए आदर्श।
  • चित्रा (विश्वकर्मा-शासित) — आभूषण, लग्ज़री वस्तुएँ, कॉस्मेटिक उपचार और अनुकूलित डिज़ाइन के लिए सर्वश्रेष्ठ।
  • अनुराधा (मित्र देवता-शासित) — सामाजिक सौहार्द। प्रियजन को उपहार या सगाई की अंगूठी खरीदने का श्रेष्ठ समय।
  • रेवती (पूर्णता, समृद्धि) — महँगी खरीद अंतिम रूप देने या अचल-संपत्ति सौदे "मृदु" वार्ता से बंद करने के लिए।
  • हस्त (हस्तशिल्प का स्वामी) — हस्तनिर्मित आभूषण, घड़ियाँ, मालिश, सौन्दर्य प्रक्रियाएँ।

दोहरी पुष्टि के लिए: मृदु नक्षत्र को शुभ होरा (ग्रह-घण्टे) के साथ मिलाएँ। आभूषण खरीदारी चित्रा नक्षत्र + शुक्र होरा में सर्वाधिक फलप्रद होती है।


गंडांत: राशि-चक्र के कार्मिक उलझन-स्थान

गंडांत (संस्कृत: gaṇḍānta — "अंत में उलझन") वे अति-संवेदनशील बिंदु हैं जहाँ राशि और नक्षत्र दोनों एक साथ समाप्त होते हैं। यह केवल जल-से-अग्नि राशि संधि पर होता है।

तीन गंडांत क्षेत्र:

  1. रेवती → अश्विनी (मीन/मेष सीमा)
  2. आश्लेषा → मघा (कर्क/सिंह सीमा)
  3. ज्येष्ठा → मूल (वृश्चिक/धनु सीमा)

बी.वी. रमण का स्पष्ट निर्देश: "आश्लेषा, ज्येष्ठा, मूल, रेवती और अश्विनी के अंतिम घटी तथा मघा के प्रथम चार घटी सभी शुभ कार्यों के लिए वर्जित हैं।"

ये दिन मानसिक संकट क्यों लाते हैं?

ऊर्जात्मक दृष्टि से गंडांत एक आत्मिक चक्र की परिसमाप्ति (जल = भावनात्मक एकीकरण) और नए चक्र के विस्फोटक, अस्थिर आरम्भ (अग्नि = पहचान का दावा) के बीच की संधि है। मन दो लोकों के बीच फँसा है। जन्म-ज्योतिष में गंडांत में जन्म गहन मनोवैज्ञानिक परिवर्तन और शांति-संस्कार की आवश्यकता से जुड़ा है।

महत्त्वपूर्ण: गंडांत अभिशाप नहीं — यह अनिवार्य कार्मिक पुनर्स्थापना है। इन अंशों में जन्मे लोग प्रायः शक्तिशाली परिवर्तनकर्ता बनते हैं क्योंकि वे दो लोकों से बद्ध होकर उन्हें सेतुबद्ध करने में सक्षम होते हैं।


ताराबल: आपका व्यक्तिगत नक्षत्र-सूचकांक

ताराबल (संस्कृत: tārabala — "तारे की शक्ति") चंद्रमा के दैनिक गोचर को आपके जन्म नक्षत्र के सापेक्ष मापकर व्यक्तिगत भविष्यवाणी देता है।

गणना विधि

  1. अपना जन्म नक्षत्र ज्ञात करें — StarMeet कैलकुलेटर से
  2. जन्म नक्षत्र से आज के चंद्र नक्षत्र तक पंचांग में गिनें
  3. 9 से भाग दें। शेषफल (यदि 0 हो तो 9 मानें) = आज की आपकी तारा

नव-तारा चक्र (Navatara Chakra)

क्रमांकतारासंस्कृतस्वभाव
1जन्मjanmaमिश्रित — व्यक्तिगत
2सम्पत्sampat✅ शुभ — धन, लाभ
3विपत्vipat❌ खतरा
4क्षेमkṣema✅ शुभ — कल्याण
5प्रत्यक्pratyak❌ बाधा
6साधकsādhaka✅ उपलब्धि
7वध/नैधनvadha❌ विनाश (सर्वाधिक अशुभ)
8मित्रmitra✅ मैत्री
9परम मित्रparama mitra✅ महामित्र

के.एन. राव ने जोर देकर कहा: जब चंद्रमा आपके जन्म नक्षत्र से 3, 5 या 7 वें स्थान पर हो, तब कोई नई नौकरी शुरू न करें, कोई अनुबंध न करें और कोई महत्त्वपूर्ण यात्रा न करें।

क्यों कुछ दिन सफलता नहीं मिलती

रोहन (28, दिल्ली) ने निवेशकों के सामने प्रस्तुति के लिए सप्ताहभर तैयारी की। प्रस्तुति के दिन लैपटॉप खराब हुआ, स्लाइड उलट-पुलट हो गईं, निवेशक निराश चले गए। पंचांग देखने पर पता चला — वह दिन उनकी विपत् तारा था। यह अयोग्यता नहीं — यह कार्मिक घर्षण था जिसे तैयारी से नहीं टाला जा सकता। अगली बैठक साधक तारा पर निर्धारित हुई — और फंडिंग मिली।

महीने में तीन खतरनाक दिन — और उपाय

27 नक्षत्रों के तीन 9-नक्षत्र चक्रों के कारण विपत्, प्रत्यक् और वध प्रतिमाह लगभग तीन बार आते हैं — कुल ~9 सतर्कता दिन। यदि टालना सम्भव न हो: बी.वी. रमण के अनुसार विपत् पर गुड़, प्रत्यक् पर नमक और वध पर तिल/सोना दान करें।


संबंधों के लिए नक्षत्र: पहली मुलाकात और मेल-मिलाप

पंचांग हृदय के मामलों में सर्वश्रेष्ठ परामर्शदाता है। शास्त्रीय विवाह-मुहूर्त ग्रंथ विवाह और प्रेम-आरम्भ के लिए केवल 10 नक्षत्रों को स्वीकृति देते हैं।

प्रेम-मुलाकात और विवाह के लिए शुभ: रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, उत्तराषाढ़ा, उत्तरभाद्रपद, रेवती

वर्जित: ज्येष्ठा, मूल, आर्द्रा, आश्लेषा, शतभिषा — इनकी तीक्ष्ण या उग्र प्रकृति प्रेम-संदर्भ में अचानक विच्छेद या मानसिक क्रूरता को जन्म दे सकती है।

जोड़ों की नक्षत्र-अनुकूलता

अष्टकूट मिलान में नक्षत्र तीन महत्त्वपूर्ण मानकों का निर्धारण करता है:

  • नाड़ी दोष — 27 नक्षत्रों को तीन नाड़ियों (आदि, मध्य, अंत्य) में विभाजित किया जाता है। समान नाड़ी वाले दम्पतियों में स्वभावगत घर्षण और संतान-समस्या की क्लासिकल आशंका रहती है।
  • योनि (पशु-प्रतीक अनुकूलता) — प्रत्येक नक्षत्र को 14 पशु-प्रतीकों (योनियों) में से एक दिया गया है। प्राकृतिक शत्रु-युग्म (नेवला–साँप, बाघ–गाय, बिल्ली–चूहा) अस्तित्वगत असंगति उत्पन्न करते हैं।
  • तारा दोष — यदि Partner B का नक्षत्र Partner A के जन्म नक्षत्र से 7वें (वध) स्थान पर हो, तो B अनजाने में A की ऊर्जा क्षीण करता है।

मेल-मिलाप के लिए मुहूर्त

विवाद के बाद सही नक्षत्र उतना ही महत्त्वपूर्ण है जितने सही शब्द। आर्द्रा में (रुद्र-शासित) की गई माफी रक्षात्मकता जगाएगी; वही प्रयास मृगशिरा में (चंद्र-शासित) हृदय खोल देगा। के.एन. राव गंडांत काल में मेल-मिलाप का प्रयास न करने की कड़ी सलाह देते हैं।


नवांश और पाद: जन्म-समय की सटीकता क्यों ज़रूरी है

प्रत्येक नक्षत्र 4 पादों (चरणों) में विभक्त होता है — प्रत्येक पाद ठीक 3°20' का। यही पाद नवांश (D-9) कुण्डली की नींव बनाते हैं — जिसे के.एन. राव ने "कुण्डली का X-ray" कहा, विशेषकर विवाह और आत्मा के गहन विश्लेषण के लिए।

गणित: 27 नक्षत्र × 4 पाद = 108 पाद = 108 नवांश खंड। एक पाद संधि मात्र 13–15 मिनट में होती है।

व्यावहारिक उदाहरण: 20 मिनट के अंतर से जन्मे दो व्यक्तियों की लग्न-नक्षत्र (अश्विनी) एक हो सकती है, किंतु पाद अलग:

  • अश्विनी पाद 1 → नवांश लग्न मेष
  • अश्विनी पाद 2 → नवांश लग्न वृषभ

के.एन. राव की बार-बार की चेतावनी: जन्म-समय में 15 मिनट की त्रुटि नवांश लग्न को गलत कर देती है, जिससे विवाह-भविष्यवाणी पूर्णतः अमान्य हो जाती है। StarMeet कैलकुलेटर में सटीक जन्म-समय दर्ज करें।


नक्षत्र देवता और उनका व्यावहारिक महत्त्व

नक्षत्रदेवताव्यावहारिक प्रयोग
अश्विनीअश्विनी कुमार (दिव्य वैद्य)चिकित्सा आरम्भ, पहली चिकित्सक-भेंट
रोहिणीब्रह्मा (सृष्टिकर्ता)निर्माण, दीर्घकालिक सृजन
मृगशिराचंद्रमाप्रेम, सौन्दर्य, नए वस्त्र
आर्द्रारुद्र (तूफान)केवल क्रूर, विध्वंसात्मक कार्य
पुष्यबृहस्पतिसभी कार्यों के लिए श्रेष्ठ
आश्लेषासर्प देवतारहस्य-विद्या; शुभ आरम्भ के लिए नहीं
मघापितृ देवतापितृ-अनुष्ठान; व्यावसायिक आरम्भ के लिए नहीं
स्वातीवायु देववाहन-क्रय, यात्रा, नई दिशाएँ
चित्राविश्वकर्माआभूषण, डिज़ाइन, विलासिता-खरीद
रेवतीपूषन (मार्गदर्शक)सौदे पूरे करना, अंतिम निर्णय

आज का नक्षत्र कैसे जानें: पंचांग पठन गाइड

  1. आज का नक्षत्र किसी भी पंचांग ऐप (Drik Panchang, iShubhTime या StarMeet) में देखें
  2. उसका स्वभाव ऊपर दी सप्त-गण तालिका से पहचानें
  3. अपनी ताराबल — जन्म नक्षत्र से आज तक गिनें
  4. गंडांत जाँचें — क्या चंद्रमा जल-अग्नि संधि में है?
  5. महत्त्वपूर्ण दिनों के लिए — मृदु/लघु नक्षत्र + शुभ ग्रह-होरा

अभिजित विकल्प: यदि आज कोई शुभ नक्षत्र न हो परंतु कार्य अत्यावश्यक हो — दोपहर के सूर्य के आसपास 48 मिनट के अभिजित काल का उपयोग करें।


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गहराई से जानें: सम्बंधित लेख

  • 27 नक्षत्र: वैदिक ज्योतिष की पूर्ण मार्गदर्शिका — सभी नक्षत्र, पाद और स्वामी
  • अश्विनी नक्षत्र: वैदिक राशि-चक्र का प्रथम तारा — विस्तृत विवेचन
  • दाराकारक: जैमिनी ज्योतिष में जीवनसाथी का ग्रह — ज्योतिष द्वारा साथी खोजने की कला

यह लेख शास्त्रीय ज्योतिष स्रोतों पर आधारित है: बृहत् पराशर होरा शास्त्र, बी.वी. रमण की "मुहूर्त" और के.एन. राव के मूलभूत पाठ। यह उन सभी के लिए लिखा गया है जो वैदिक ज्योतिष को जीवन-नियोजन के व्यावहारिक उपकरण के रूप में प्रयोग करना चाहते हैं।

प्रत्येक शुभ घड़ी आपके जीवन में तारों का प्रकाश लेकर आए। ✨

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जन्म नक्षत्र कैसे जानें?

जन्म नक्षत्र जन्म के समय चंद्रमा की स्थिति से तय होता है। इसके लिए जन्म तिथि, समय और स्थान की जरूरत होती है। StarMeet के निःशुल्क जन्मपत्री कैलकुलेटर से आप तुरंत अपना जन्म नक्षत्र, उसका स्वामी और पाद जान सकते हैं।

ताराबल क्या होता है?

ताराबल आपका व्यक्तिगत नक्षत्र-शक्ति सूचकांक है। अपने जन्म नक्षत्र से आज के चंद्र नक्षत्र तक गिनें — 3वाँ (विपत), 5वाँ (प्रत्यक) और 7वाँ (वध) नक्षत्र अशुभ दिन होते हैं। के.एन. राव के अनुसार इन दिनों कोई बड़ा निर्णय नहीं लेना चाहिए।

गंडांत नक्षत्र क्या है?

गंडांत वे संधि-स्थान हैं जहाँ जल और अग्नि राशि एक साथ बदलती हैं — रेवती-अश्विनी, आश्लेषा-मघा, ज्येष्ठा-मूल। ये कार्मिक पुनर्स्थापना के बिंदु हैं। बी.वी. रमण के अनुसार इन दिनों शुभ कार्य वर्जित हैं।

विवाह के लिए कौन से नक्षत्र शुभ हैं?

रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, उत्तराषाढ़ा, उत्तरभाद्रपद और रेवती — ये 10 नक्षत्र विवाह मुहूर्त के लिए क्लासिकल ग्रंथों में विहित हैं। ज्येष्ठा, मूल, आर्द्रा वर्जित हैं।

बाल काटने के लिए कौन सा नक्षत्र सबसे अच्छा है?

मृगशिरा, चित्रा, हस्त, अनुराधा और रेवती — ये मृदु और लघु नक्षत्र बाल काटने, सौन्दर्य उपचार और नए वस्त्र धारण के लिए सर्वश्रेष्ठ हैं। विशेष रूप से मृगशिरा बालों की पुनर्जीवन ऊर्जा देती है।

महीने में कितनी बार विपत तारा आती है?

27 नक्षत्रों के तीन 9-नक्षत्र चक्रों के कारण विपत (3), प्रत्यक (5) और वध (7) तारा हर महीने लगभग 3-3 बार आती हैं — यानी कुल 9 सतर्कता दिन। के.एन. राव की सलाह: इन दिनों कोई नई नौकरी, अनुबंध या यात्रा न शुरू करें।

नक्षत्र और राशि में क्या अंतर है?

राशि परिस्थिति या वातावरण बताती है — जैसे वृश्चिक राशि तीव्र परिस्थिति। नक्षत्र बताता है कि उस वातावरण में मन कैसा अनुभव करता है। परशरा के अनुसार चंद्रमा = मन (मनस्), इसलिए नक्षत्र मुहूर्त में राशि से अधिक महत्वपूर्ण है।

27 नक्षत्र हैं तो 12 राशियाँ क्यों?

राशियाँ और नक्षत्र दो अलग प्रणालियाँ हैं। 12 राशियाँ 30°-30° के सौर खंड हैं; 27 नक्षत्र 13°20' के चांद्र खंड हैं। दोनों एक साथ काम करते हैं — राशि पृष्ठभूमि देती है, नक्षत्र सूक्ष्म भावना बताता है।

लेखक के बारे में

Vadim Arkhipov

StarMeet के संस्थापक। 2013 से ज्योतिष का अध्ययन, डॉ. के. एन. राव के अधीन उन्नत पाठ्यक्रम पूरा किया; व्यवसाय में 30+ वर्ष। यहाँ के लेख मेरे निर्देश पर लिखे जाते हैं, मसौदा AI तैयार करता है, अंतिम संपादन मैं करता हूँ।

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