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Tithi Kya Hai: आज की तिथि, एकादशी और पंचांग गाइड

March 14, 2026·By Vadim Arkhipov
वित्त एवं धन
तिथिएकादशीपंचांगशुक्ल पक्षकृष्ण पक्षरिक्ता तिथिअमावस्यापूर्णिमामुहूर्तआज की तिथि
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तिथि वैदिक ज्योतिष की एक चंद्र समय इकाई है जो सूर्य और चंद्रमा के बीच हर 12° के कोणीय अंतर पर बदलती है — इसीलिए इसकी अवधि 19 से 26 घंटे होती है, ठीक 24 नहीं। एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं: 15 शुक्ल पक्ष में और 15 कृष्ण पक्ष में। इन्हें पाँच श्रेणियों में बाँटा जाता है — नंदा, भद्रा, जय, रिक्ता और पूर्णा। रिक्ता तिथियाँ (4, 9, 14) सबसे प्रतिकूल हैं; B.V. Raman इन पर विवाह, व्यापार शुभारंभ और बड़े निर्णय टालने की स्पष्ट सलाह देते हैं। एकादशी (11वीं तिथि) वर्ष में 24 बार आती है और आध्यात्मिक साधना, व्रत तथा उपवास के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। पूर्णिमा कफ दोष से और अमावस्या वात दोष से जुड़ी है — इसी आधार पर पितृ तर्पण और सर्जरी की तिथि तय होती है। अभिजित मुहूर्त (लगभग 11:36–12:24) रिक्ता की नकारात्मक ऊर्जा को निष्प्रभावी कर सकता है। जन्म कुंडली में जन्म तिथि जानने के लिए StarMeet पंचांग कैलकुलेटर का उपयोग करें।

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Tithi Kya Hai: आज की तिथि, एकादशी और पंचांग की पूरी जानकारी

मुख्य बातें:

  • तिथि = सूर्य और चंद्रमा के बीच 12° का कोणीय अंतर; एक चंद्र दिवस 19 से 26 घंटे का होता है — ठीक 24 नहीं
  • एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ: 15 शुक्ल पक्ष में (बढ़ता चंद्र) + 15 कृष्ण पक्ष में (घटता चंद्र)
  • 5 प्रकार की तिथि — नंदा, भद्रा, जय, रिक्ता (टालें), पूर्णा — हर कार्य के लिए उपयुक्तता तय करते हैं
  • एकादशी (11वीं तिथि) — सबसे पवित्र चंद्र दिवस; व्रत और आध्यात्मिक साधना के लिए
  • अभिजित मुहूर्त (~11:36–12:24 स्थानीय समय) किसी भी प्रतिकूल तिथि को निष्प्रभावी कर सकता है (बुधवार छोड़कर)
  • तिथि विश्वव्यापी है — पूरी पृथ्वी पर एक समान; वार और होरा स्थानीय सूर्योदय से जुड़े हैं

Tithi Kya Hoti Hai: 12° का नियम और लुनर डे की गणना

वैदिक पंचांग का सबसे मूलभूत नियम यह है: जब चंद्रमा सूर्य से 12° आगे बढ़ता है, एक तिथि पूर्ण होती है।

B.V. Raman की मुहूर्त और P.V.R. Narasimha Rao की वैदिक ज्योतिष: एक समग्र दृष्टिकोण दोनों में एक ही सूत्र दिया गया है:

(चंद्रमा की देशांश − सूर्य की देशांश) ÷ 12 = भागफल और शेष तिथि संख्या = भागफल + 1

उदाहरण: चंद्रमा 85° पर, सूर्य 22° पर → अंतर 63°। 12 से भाग दें: भागफल 5, शेष 3। तिथि = 5 + 1 = षष्ठी (6वीं तिथि)।

यह अनुमान नहीं है — प्रत्येक पंचांग यह गणना निरंतर करता रहता है और जैसे ही चंद्रमा अगली 12° की सीमा पार करता है, तिथि स्वतः बदल जाती है।

तिथि ठीक 24 घंटे की क्यों नहीं होती?

चंद्रमा अण्डाकार कक्षा में परिवर्तनशील गति से चलता है:

  • पेरिजी (पृथ्वी के निकट): तेज गति — 12° लगभग 19 घंटों में पूर्ण
  • अपोजी (पृथ्वी से दूर): धीमी गति — 12° लगभग 26 घंटों में पूर्ण

इसके कारण कभी-कभी एक सौर दिन में दो तिथियाँ आती हैं, और कभी एक तिथि दो सौर दिनों तक रहती है (वृद्धि तिथि)। अत्यंत दुर्लभ अवसरों पर एक तिथि किसी भी सूर्योदय पर उपस्थित नहीं होती — इसे क्षय तिथि कहते हैं।

मुहूर्त चुनाव के लिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण है: यदि शुभ तिथि दोपहर में समाप्त हो जाती है, तो शाम की योजना उसके अंतर्गत नहीं आती।


Shukla Paksha और Krishna Paksha: चंद्रमा की दो ऊर्जाएं

30 तिथियाँ दो पक्षों में विभाजित हैं:

पक्षतिथिसूर्य-चंद्र कोणचंद्र चरणदोष (P.V.R. Rao)
शुक्ल पक्ष1–150° → 180°अमावस्या → पूर्णिमाकफ (निर्माण)
कृष्ण पक्ष16–30180° → 360°पूर्णिमा → अमावस्यावात (विसर्जन)

P.V.R. Narasimha Rao (पाठ 152) दोनों चरम बिंदुओं को आयुर्वेद के दोषों से जोड़ते हैं:

  • पूर्णिमा (शुक्ल की 15वीं तिथि): कफ दोष — पूर्ण, जलीय, पोषक ऊर्जा। शरीर में द्रव प्रतिधारण अधिकतम होती है। आयुर्वेदिक चिकित्सकों ने देखा कि पूर्णिमा के आसपास शल्य-चिकित्सा में रक्तस्राव अधिक होता है। पूर्णिमा को उपवास कफ को संतुलित करता है।

  • अमावस्या (30वीं तिथि): वात दोष — शुष्क, शीतल, वायवीय ऊर्जा। तंत्रिका तंत्र सर्वाधिक संवेदनशील। नींद हल्की, भावनाएं तीव्र, जीर्ण रोग उभर सकते हैं। B.V. Raman ने मुहूर्त में लिखा है कि रोगों के संकट चंद्र गतिविधि से जुड़े होते हैं।

व्यावहारिक बायोहैकिंग

  • शुक्ल पक्ष (तिथि 1–15): नई शुरुआत, निर्माण, पोषण, नए संबंध, व्यापार का शुभारंभ।
  • कृष्ण पक्ष (तिथि 16–30): समाप्ति, शुद्धि, डिटॉक्स, वैकल्पिक सर्जरी (रक्तस्राव का जोखिम कम)।

पाँच प्रकार की तिथि: नंदा, भद्रा, जय, रिक्ता, पूर्णा

B.V. Raman की मुहूर्त सभी 30 तिथियों को पाँच पुरातन श्रेणियों में वर्गीकृत करती है:

श्रेणीसंस्कृत अर्थतिथियाँऊर्जासर्वोत्तम कार्य
नंदाआनंद, प्रसन्नता1, 6, 11रचनात्मककला, उत्सव, मार्केटिंग, नई शुरुआत
भद्राशुभता, मंगल2, 7, 12स्थिर, दृढ़दीर्घकालिक अनुबंध, साझेदारी, निर्माण
जयविजय3, 8, 13दृढ़, प्रतिस्पर्धीप्रतियोगिता, वार्ता, खेल, सर्जरी
रिक्तारिक्त, शून्य4, 9, 14⚠️ क्षीणसभी शुभ कार्यों के लिए टालें
पूर्णापूर्ण5, 10, 15पूर्णतापरियोजना समापन, आध्यात्मिक साधना

Rikta Tithi: 4, 9, 14 तिथि — क्यों टालें?

रिक्ता संस्कृत में "रिक्त" या "शून्य" का अर्थ है। ये तीन तिथियाँ चंद्र ऊर्जा के निम्नतम बिंदु हैं। B.V. Raman स्पष्ट रूप से लिखते हैं:

"रिक्ता तिथियों (4थी, 9वीं और 14वीं) को सभी शुभ कार्यों के लिए टाला जाना चाहिए।"

रिक्ता तिथि नियम: विवाह, व्यापार शुभारंभ, अनुबंध हस्ताक्षर, वैकल्पिक सर्जरी और बड़े निवेश 4थी, 9वीं या 14वीं तिथि को न करें। इन दिनों की "रिक्त" ऊर्जा हर नई शुरुआत को कमज़ोर बनाती है।

रिक्ता तिथि के व्यावहारिक प्रभाव:

  • विवाह: रिक्ता दिनों में हुए विवाह में कलह और अलगाव की संभावना अधिक।
  • व्यापार: रिक्ता पर स्थापित कंपनियाँ प्रारंभिक बाधाओं का सामना करती हैं।
  • चिकित्सा: वैकल्पिक सर्जरी के परिणाम पारंपरिक ग्रंथों में कमज़ोर बताए गए हैं।
  • वित्तीय निर्णय: संपत्ति खरीद, बड़े निवेश और ऋण हस्ताक्षर टालें।

यात्रा पर विशेष चेतावनी: B.V. Raman 8वीं (अष्टमी) और 9वीं (नवमी) तिथियों को यात्रा प्रारंभ के लिए विशेष रूप से खतरनाक बताते हैं। उल्लेखनीय है कि अष्टमी जय श्रेणी में है — फिर भी यात्रा के लिए प्रतिकूल। यह दर्शाता है कि तिथि का गुण गतिविधि पर निर्भर करता है।

रिक्ता तिथि को कैसे निष्प्रभावी करें?

B.V. Raman, ऋषि नारद को उद्धृत करते हुए, दो उपाय देते हैं:

1. अभिजित मुहूर्त — लगभग 11:36 से 12:24 का मध्यकालीन खिड़की किसी भी तिथि की नकारात्मक ऊर्जा को निष्प्रभावी करती है — बुधवार को छोड़कर, जब अभिजित भी प्रभावहीन होता है।

2. गुरु या शुक्र का लग्न या केंद्र/त्रिकोण में स्थित होना — यदि कुंडली में बृहस्पति या शुक्र लग्न, केंद्र (1, 4, 7, 10) या त्रिकोण (1, 5, 9) में हों, तो रिक्ता का प्रभाव काफी कम हो जाता है।


Ekadashi Today: एकादशी की महिमा, Nirjala और Vaikunta Ekadashi

30 तिथियों में एकादशी का स्थान अद्वितीय है। शुक्ल और कृष्ण पक्ष दोनों में 11वीं तिथि के रूप में यह वर्ष में 24 बार (कभी-कभी 25) आती है। वैदिक परंपरा में इसे चंद्र चक्र का सर्वाधिक आध्यात्मिक रूप से शक्तिशाली दिन माना जाता है।

P.V.R. Rao (पाठ 114–118) एकादशी को गायत्री मंत्र और आध्यात्मिक साधना के लिए विशेष रूप से शुभ बताते हैं: मन स्वाभाविक रूप से इंद्रियों से हटकर सूक्ष्म अनुभव की ओर जाता है।

वैदिक परंपरा के अनुसार, एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित है। प्रमुख एकादशियाँ:

एकादशीमाह / पक्षविशेषता
निर्जलाज्येष्ठ शुक्ल (मई–जून)जलरहित पूर्ण उपवास; सभी 24 एकादशियों के समान पुण्य
वैकुण्ठमार्गशीर्ष शुक्ल (नव–दिस)सर्वाधिक शक्तिशाली; वैकुण्ठ के द्वार खुले माने जाते हैं
देवोत्थानी (प्रबोधिनी)कार्तिक शुक्ल (अक्टू–नव)चातुर्मास की समाप्ति; विवाह का शुभ मौसम शुरू
आषाढ़ीआषाढ़ शुक्ल (जून–जुलाई)चातुर्मास का प्रारंभ; पंढरपुर यात्रा

एकादशी व्रत: कोशिकीय नवीनीकरण का विज्ञान

परंपरा जिसे आध्यात्मिक शुद्धि कहती है, आधुनिक विज्ञान उसे शारीरिक रूप से प्रमाणित करता है:

  • 24–36 घंटे का उपवास (एकादशी व्रत का सामान्य पैटर्न) ऑटोफेजी को सक्रिय करता है — कोशिकाओं द्वारा क्षतिग्रस्त प्रोटीन और अंगकों को पुनर्चक्रित करने की प्रक्रिया। ऑटोफेजी अनुसंधान को 2016 का नोबेल पुरस्कार मिला।
  • एकादशी पूर्णिमा के 4 दिन बाद (कृष्ण पक्ष में) और अमावस्या के 4 दिन बाद (शुक्ल पक्ष में) पड़ती है — आयुर्वेदिक चिकित्सक इन्हें पाचन तंत्र को विश्राम देने के लिए सर्वोत्तम बिंदु मानते थे।

एकादशी व्रत विधि: एकादशी के सूर्योदय से व्रत प्रारंभ करें। अनाज, दाल और मद्य वर्जित। अधिकांश परंपराओं में फल, दूध और मेवे अनुमत हैं। निर्जला एकादशी में जल भी वर्जित है। अगले दिन द्वादशी को हल्के आहार से पारण करें।


Aaj Ki Tithi कैसे पता करें: पंचांग पढ़ने का आसान तरीका

आज की तिथि जानना बेहद सरल है। दो मुख्य तरीके:

विधि 1 — StarMeet पंचांग कैलकुलेटर: StarMeet पंचांग खोलें। यह आपकी सटीक भौगोलिक स्थिति (शहर) के अनुसार आज की तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल, और अभिजित मुहूर्त स्वचालित रूप से दिखाता है।

विधि 2 — पंचांग ऐप: कोई भी विश्वसनीय भारतीय पंचांग ऐप। ध्यान रखें: यदि आप भारत से बाहर हैं, तो IST (UTC+5:30) के बजाय स्थानीय सूर्योदय के अनुसार गणना करने वाले टूल का उपयोग करें।

तिथि परिवर्तन का समय: तिथि ठीक मध्यरात्रि को नहीं बदलती — यह तब बदलती है जब चंद्रमा अगली 12° की सीमा पार करता है। इसलिए एक ही कैलेंडर दिन में दो तिथियाँ हो सकती हैं।

पंचांग में तिथि की जानकारी कैसे पढ़ें

किसी भी पंचांग में तिथि के साथ यह जानकारी मिलती है:

  • तिथि का नाम और संख्या: जैसे पंचमी (5वीं), द्वादशी (12वीं)
  • तिथि का अंत समय: यानी यह तिथि कब समाप्त होगी और अगली कब शुरू होगी
  • पक्ष: शुक्ल या कृष्ण

Amavasya और Purnima: अमावस्या और पूर्णिमा की ऊर्जा

पूर्णिमा (Purnima)

पूर्णिमा शुक्ल पक्ष की 15वीं तिथि है जब सूर्य-चंद्र कोण 180° होता है। P.V.R. Rao (पाठ 152) के अनुसार यह कफ दोष का चरम है — शरीर में जल तत्व की अधिकता।

पूर्णिमा की परंपराएं:

  • सत्यनारायण कथा और पूजा
  • उपवास (कफ संतुलन के लिए)
  • स्नान और दान
  • आध्यात्मिक साधना — उर्जा अपने शिखर पर

अमावस्या (Amavasya)

अमावस्या 30वीं तिथि है जब सूर्य और चंद्रमा एकसाथ होते हैं। P.V.R. Rao (पाठ 152) इसे वात दोष का चरम बताते हैं — तंत्रिका तंत्र सर्वाधिक संवेदनशील।

अमावस्या की परंपराएं:

  • पितृ तर्पण: नदी, तालाब या पवित्र स्थान पर जल और तिल से पूर्वजों को अर्पण — वंशगत कर्म की शुद्धि
  • पूर्वजों की स्मृति में उपवास
  • मौन और ध्यान — सूक्ष्म जगत की संवेदनशीलता अधिकतम

आधुनिक अनुप्रयोग: अमावस्या को बड़े व्यावसायिक निर्णयों से बचें। यह आत्म-चिंतन, छाया कार्य (shadow work), पुरानी आदतों को छोड़ने और चंद्र चक्र के आधार स्तर पर नई शुरुआत के लिए शक्तिशाली समय है।


तिथि के ग्रह स्वामी: 1 से 15 तक की तालिका

वैदिक परंपरा के अनुसार शुक्ल पक्ष की प्रत्येक तिथि का एक ग्रह स्वामी होता है जो उस दिन की ऊर्जा को रंग देता है। यही चक्र कृष्ण पक्ष में दोहराता है (16वीं से 30वीं):

तिथिनामस्वामीऊर्जाश्रेष्ठ कार्य
1प्रतिपदासूर्यशक्ति, अधिकारसरकारी कार्य, नेतृत्व
2द्वितीयाचंद्रभावना, लचीलापनपरिवार, कला, यात्रा
3तृतीयामंगलसाहस, दृढ़ताखेल, प्रतियोगिता, सर्जरी
4चतुर्थीबुध⚠️ रिक्ताशुभ कार्य टालें
5पंचमीगुरुज्ञान, विस्तारशिक्षा, चिकित्सा, अनुष्ठान
6षष्ठीशुक्रसौंदर्य, आनंदकला, संबंध, उत्सव
7सप्तमीशनिअनुशासन, कर्मदीर्घकालिक निवेश, कानूनी
8अष्टमीराहुव्यवधान⚠️ जय, परंतु यात्रा से बचें
9नवमीसूर्य (चक्र)⚠️ रिक्तायात्रा के लिए विशेष खतरनाक
10दशमीचंद्र (चक्र)समापनपूर्णा — परियोजना पूर्णता
11एकादशीविष्णु / गुरुमुक्तिव्रत, मंत्र, पितृ कार्य
12द्वादशीबुध (चक्र)संचारपारण, अनुबंध, संवाद
13त्रयोदशीगुरु (चक्र)शुभताआध्यात्मिक साधना, शुभ कार्य
14चतुर्दशीशिव / शनिविघटन⚠️ रिक्ता (शैव अनुष्ठान शक्तिशाली)
15पूर्णिमाचंद्रपरिपूर्णतापूर्णा — आध्यात्मिक चरमोत्कर्ष

Kshaya और Vriddhi Tithi: छूटी और दोहरी तिथियाँ

क्षय तिथि — जब तिथि दो सूर्योदयों के बीच की रात में शुरू होकर समाप्त हो जाती है, किसी भी सूर्योदय पर उपस्थित नहीं रहती। यह तिथि "निगल ली" जाती है — इसकी ऊर्जा पूरी तरह प्रकट नहीं होती। क्षय तिथि पर मुख्य मुहूर्त से बचें।

वृद्धि तिथि — जब चंद्रमा इतनी धीरे चलता है कि एक तिथि दो सूर्योदयों को कवर करती है। यह सामान्यतः शुभ मानी जाती है — उस तिथि की ऊर्जा दो दिनों तक "विस्तृत" रहती है।

दोनों प्रकार वर्ष में कई बार आते हैं और किसी भी सटीक पंचांग में अंकित रहते हैं। StarMeet पंचांग इन्हें आपकी भौगोलिक स्थिति के अनुसार स्वतः दर्शाता है।


मुहूर्त मैट्रिक्स: हर कार्य के लिए श्रेष्ठ तिथि

B.V. Raman की मुहूर्त में प्रमुख जीवन घटनाओं के लिए विशिष्ट तिथि निर्देश दिए गए हैं:

कार्यबचेंश्रेष्ठ तिथियाँ
विवाहरिक्ता (4, 9, 14), 6वीं, 8वीं, 12वीं2, 5, 7, 10, 11, 13, 15
यात्रा8वीं और 9वीं (Raman)2, 3, 5, 7, 10, 11, 12, 13
व्यापार शुभारंभरिक्ता3, 13 (जय); 1, 6, 11 (नंदा)
अनुबंध हस्ताक्षररिक्ता2, 7, 12 (भद्रा)
वैकल्पिक सर्जरीपूर्णिमा ±3 दिनकृष्ण पक्ष, 10वीं–13वीं
आध्यात्मिक साधना / व्रत—11वीं, 15वीं, 30वीं

विवाह में तिथि (Raman के अनुसार)

बचें: रिक्ता तिथि (4, 9, 14) बिल्कुल भी नहीं। साथ ही 6वीं, 8वीं, 12वीं तिथि से भी सामान्यतः बचें।

महत्वपूर्ण अपवाद (B.V. Raman): 6वीं तिथि और साधना नक्षत्र का संयोग विवाह के लिए स्वीकार्य हो जाता है — यह दर्शाता है कि संयोजन अकेले तत्व से अधिक महत्वपूर्ण है।


Tithi Today और समय क्षेत्र: एकादशी अलग-अलग स्थानों पर अलग क्यों?

यह प्रश्न प्रवासी भारतीयों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

तिथि विश्वव्यापी है। यह सूर्य और चंद्रमा की वर्तमान खगोलीय स्थितियों से निर्धारित होती है, जो पृथ्वी पर कहीं से भी समान हैं। जब चंद्रमा 3 AM UTC पर 66° का सूर्य-चंद्र कोण पार करता है, यह मॉस्को, मुंबई और मैक्सिको सिटी — सभी के लिए एक साथ होता है।

वार और होरा स्थानीय हैं। वार (सप्ताह का दिन) स्थानीय सूर्योदय पर बदलता है। जो व्यक्ति न्यूयॉर्क में है वह भारत के व्यक्ति से 10.5 घंटे पीछे है — दोनों के वार बिल्कुल अलग हो सकते हैं।

IST की समस्या: बहुत से लोग IST (UTC+5:30) के अनुसार बने पंचांग का उपयोग करते हैं। यदि आप विदेश में हैं — यह एकादशी की सही तारीख को एक दिन आगे-पीछे कर सकता है।

समाधान: अपने सटीक स्थान के लिए स्थानीय सूर्योदय आधारित पंचांग का उपयोग करें। StarMeet पंचांग विश्व के किसी भी शहर के लिए सटीक पाँचों पंचांग अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण — के साथ राहु काल और अभिजित मुहूर्त देता है।


सिद्ध योग: वार, तिथि और नक्षत्र का परिपूर्ण संयोग

B.V. Raman मुहूर्त में सिद्ध योग का वर्णन करते हैं — वार, तिथि और नक्षत्र का ऐसा त्रिगुणात्मक संयोग जो असाधारण शुभ मुहूर्त खिड़की बनाता है।

एक विशिष्ट उदाहरण: गुरुवार + चतुर्थी (रिक्ता!) + मखा नक्षत्र = सिद्ध योग

यह आश्चर्यजनक है: चतुर्थी रिक्ता तिथि है — सामान्यतः सभी शुभ कार्यों के लिए वर्जित। फिर भी गुरुवार (बृहस्पति का दिन) और मखा नक्षत्र के संयोग से रिक्ता की "शून्यता" भी सिद्ध हो जाती है।

प्राथमिकता का क्रम (नारद → Raman)

  1. लग्न (आरोही) — सर्वोच्च; सब कुछ को प्रभावित करता है
  2. नक्षत्र — दूसरा महत्वपूर्ण कारक
  3. तिथि — तीसरा
  4. वार — चौथा

यदि लग्न बलवान हो तो रिक्ता तिथि भी काम कर सकती है। यदि लग्न पीड़ित हो तो सर्वोत्तम तिथि भी नहीं बचा सकती।


संस्कृत शब्द-कोश

संस्कृतउच्चारणअर्थ
तिथिTithiचंद्र दिवस (12° सूर्य-चंद्र कोण)
पक्षPakshaपखवाड़ा
शुक्ल पक्षShukla Pakshaउज्जवल पखवाड़ा (बढ़ता चंद्र, 1–15)
कृष्ण पक्षKrishna Pakshaअंधेरा पखवाड़ा (घटता चंद्र, 16–30)
पूर्णिमाPurnimaपूर्ण चंद्र (15वीं शुक्ल तिथि)
अमावस्याAmavasyaनया चंद्र (30वीं तिथि)
एकादशीEkadashi11वीं तिथि; विष्णु को समर्पित
रिक्ताRiktaरिक्त / शून्य (4, 9, 14)
नंदाNandaआनंद (1, 6, 11)
भद्राBhadraशुभता (2, 7, 12)
जयJayaविजय (3, 8, 13)
पूर्णाPoornaपूर्णता (5, 10, 15)
मुहूर्तMuhurtaशुभ समय खिड़की
क्षय तिथिKshaya Tithiछूटी हुई चंद्र तिथि
वृद्धि तिथिVriddhi Tithiदोहरी चंद्र तिथि
सिद्ध योगSiddha Yogaवार+तिथि+नक्षत्र का परिपूर्ण संयोग
अभिजित मुहूर्तAbhijit Muhurtaमध्याह्न का उद्धारकर्ता खिड़की
पितृ तर्पणPitru Tarpanaअमावस्या को पूर्वजों को जल अर्पण

आज की तिथि: 2 मिनट में जाँचें

तिथि अभ्यास के लिए गहन ज्योतिष ज्ञान आवश्यक नहीं। न्यूनतम दैनिक प्रोटोकॉल:

चरण 1 (30 सेकंड): StarMeet पंचांग खोलें। आज की तिथि संख्या और श्रेणी नोट करें।

चरण 2 (30 सेकंड): क्या यह रिक्ता दिन है? (4, 9 या 14) → हाँ: विवाह, सर्जरी, बड़े अनुबंध टालें। अपरिहार्य हो तो अभिजित मुहूर्त में करें।

चरण 3 (30 सेकंड): कौन सा पक्ष है? शुक्ल → शुरुआत करें। कृष्ण → पूरा करें।

चरण 4 (30 सेकंड): क्या आज एकादशी है? → व्रत और आध्यात्मिक साधना करें; भारी भोजन से बचें।

JTBD (हर कार्य के लिए सही तिथि)

लक्ष्यसर्वोत्तम तिथिश्रेणी
उत्पाद लॉन्च / प्रतिस्पर्धी कदम3री, 13वींजय
अनुबंध हस्ताक्षर / साझेदारी2री, 7वीं, 12वींभद्रा
रचनात्मक परियोजना / मार्केटिंग1ली, 6वीं, 11वींनंदा
परियोजना समापन5वीं, 10वीं, 15वींपूर्णा
वैकल्पिक सर्जरी10वीं–13वीं (कृष्ण पक्ष)—
आध्यात्मिक साधना / व्रत11वीं, 15वीं, 30वीं—
सभी शुभ कार्य — बचें—4, 9, 14 (रिक्ता)

निष्कर्ष: तिथि एक जीवंत कैलेंडर है

तिथि प्रणाली अंधविश्वास नहीं है — यह पाँच हज़ार वर्षों की अनुप्रयुक्त ज्योतिषीय बुद्धिमत्ता है, जो खगोलीय परिशुद्धता और पीढ़ियों के अनुभव पर आधारित है। प्रत्येक तिथि एक अद्वितीय ऊर्जा हस्ताक्षर लेकर आती है जिसके साथ सहयोग किया जा सकता है।

सबसे सुलभ व्यावहारिक निष्कर्ष: रिक्ता तिथियों (4, 9, 14) पर कोई भी महत्वपूर्ण शुरुआत न करें। यह एक नियम, लगातार लागू करने से, आपकी योजना में उल्लेखनीय सुधार करता है।

अपनी जन्म तिथि जानने के लिए — वह चंद्र दिवस जब आप पैदा हुए थे — और यह समझने के लिए कि वह आपके स्वभाव और जीवन-विषयों को कैसे आकार देती है, StarMeet पर अपनी जन्म कुंडली गणना करें।

दैनिक तिथि, नक्षत्र, राहु काल और मुहूर्त के लिए StarMeet पंचांग कैलकुलेटर का उपयोग करें — हिंदी में उपलब्ध, भौगोलिक स्थिति-जागरूक। पाँचों पंचांग अंगों के पूर्ण संदर्भ के लिए पंचांग की पूरी गाइड पढ़ें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तिथि क्या है?

तिथि वैदिक ज्योतिष में एक चंद्र दिवस है जो चंद्रमा और सूर्य के बीच 12° के कोणीय अंतर से परिभाषित होता है। एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं — 15 शुक्ल पक्ष में और 15 कृष्ण पक्ष में। तिथि की अवधि 19 से 26 घंटे होती है।

आज की तिथि कैसे पता करें?

StarMeet पंचांग कैलकुलेटर (/panchang) से आज की तिथि, नक्षत्र, राहु काल और मुहूर्त अपनी सटीक भौगोलिक स्थिति के अनुसार जानें। यह IST की बजाय स्थानीय सूर्योदय से गणना करता है।

रिक्ता तिथि क्यों टालनी चाहिए?

रिक्ता तिथि (4, 9, 14) में चंद्र ऊर्जा न्यूनतम होती है। B.V. Raman लिखते हैं: 'रिक्ता तिथियों को सभी शुभ कार्यों के लिए टाला जाना चाहिए।' विवाह, व्यापार शुभारंभ, सर्जरी और बड़े वित्तीय निर्णय इन दिनों टालें।

एकादशी का क्या महत्व है?

एकादशी 11वीं तिथि है जो प्रत्येक चंद्र मास में दो बार (वर्ष में 24 बार) आती है। यह भगवान विष्णु को समर्पित सबसे पवित्र तिथि है। P.V.R. Rao के अनुसार यह गायत्री मंत्र और आध्यात्मिक अभ्यास के लिए विशेष रूप से शुभ है।

शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष में क्या अंतर है?

शुक्ल पक्ष अमावस्या से पूर्णिमा तक का चंद्र पखवाड़ा है (तिथि 1–15, कोण 0°→180°)। कृष्ण पक्ष पूर्णिमा से अमावस्या तक (तिथि 16–30, कोण 180°→360°)। शुक्ल पक्ष आरंभ के लिए और कृष्ण पक्ष समाप्ति व शुद्धि के लिए श्रेष्ठ है।

पूर्णिमा का ज्योतिष में क्या महत्व है?

पूर्णिमा शुक्ल पक्ष की 15वीं तिथि है जब सूर्य-चंद्र का कोण 180° होता है। P.V.R. Rao (पाठ 152) के अनुसार पूर्णिमा कफ दोष से संबंधित है — पूर्ण, जलीय, पोषक ऊर्जा। यह आध्यात्मिक साधना, समापन और उत्सव के लिए श्रेष्ठ है।

अमावस्या क्या है?

अमावस्या 30वीं तिथि है जब सूर्य और चंद्रमा एक साथ होते हैं। P.V.R. Rao (पाठ 152) के अनुसार यह वात दोष की चरम अवस्था है। पितृ तर्पण, ध्यान और पूर्वजों की स्मृति के लिए यह विशेष दिन है।

निर्जला एकादशी क्या है?

निर्जला एकादशी ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी को पड़ती है और सबसे कठोर व्रत माना जाता है — जल भी वर्जित। मान्यता है कि इसका पुण्य सभी 24 एकादशियों के बराबर होता है।

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