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Ashwini Nakshatra: अश्विनी नक्षत्र की सम्पूर्ण जानकारी — गुण, विवाह और करियर

March 18, 2026·By Vadim Arkhipov
व्यक्तिगत विकास
अश्विनी नक्षत्रनक्षत्रज्योतिषकेतुमेष राशिजयोतिष
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अश्विनी नक्षत्र वैदिक ज्योतिष की 27 नक्षत्रों में सबसे पहली नक्षत्र है, जो मेष राशि के 0° से 13°20′ तक फैली है और केतु के स्वामित्व में है। इस नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता अश्विनी कुमार — देवताओं के दिव्य वैद्य जुड़वां — हैं, जो उपचार, गति और नई शुरुआत की शक्ति देते हैं। इस नक्षत्र में जन्मे जातकों की विमशोत्तरी दशा केतु की 7 वर्षीय महादशा से प्रारंभ होती है। अश्विनी के चार चरण (पाद) क्रमशः मेष, वृष, मिथुन और कर्क नवांश में पड़ते हैं, जो जातक के स्वभाव को महत्वपूर्ण रूप से संशोधित करते हैं। यह गण्डमूल नक्षत्र है — जन्म के 27वें दिन शांति पूजा अनुशंसित है। करियर में चिकित्सा, शल्य चिकित्सा, सैन्य सेवा और उद्यमिता सर्वश्रेष्ठ हैं। अष्टकूट मिलान में भरणी और पुष्य के साथ अनुकूलता सर्वाधिक रहती है। कुंडली में अश्विनी का फल उसमें स्थित ग्रह — लग्न, चंद्रमा या सूर्य — के अनुसार बदलता है।

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अश्विनी नक्षत्र — वैदिक ज्योतिष की 27 नक्षत्रों में सबसे पहली नक्षत्र — प्रभात, नई शुरुआत और अश्विनी कुमारों के दिव्य उपचार की ऊर्जा वहन करती है। मेष राशि के 0° से 13°20′ तक फैली और केतु द्वारा शासित यह नक्षत्र अग्रणी व्यक्तित्वों को जन्म देती है: तेज, जीवंत और क्रिया के प्रति सहज रूप से उन्मुख। इस गाइड में अश्विनी नक्षत्र की सम्पूर्ण जानकारी है — मुख्य विशेषताओं और 4 चरणों से लेकर अनुकूलता, करियर मार्गों और जन्म कुंडली में इसकी व्याख्या तक।

अश्विनी नक्षत्र — मुख्य तथ्य

  • अश्विनी 27 नक्षत्रों में पहली है, जो मेष के 0°–13°20′ (सायन) को कवर करती है
  • स्वामी ग्रह: केतु | देवता: अश्विनी कुमार (दिव्य वैद्य जुड़वां)
  • प्रतीक: घोड़े का सिर | गण: देव | नाड़ी: वात
  • विमशोत्तरी दशा: जन्म से 7 वर्षीय केतु महादशा
  • गण्डमूल नक्षत्र — 27वें दिन परंपरागत शांति पूजा अनुशंसित
  • सर्वाधिक अनुकूल: भरणी, पुष्य, अश्विनी (स्वयं)
  • श्रेष्ठ करियर: चिकित्सा, शल्य चिकित्सा, खेल, सैन्य, उद्यमिता

Ashwini Nakshatra क्या है? — वैदिक ज्योतिष की पहली नक्षत्र

अश्विनी नक्षत्र वैदिक खगोलीय चक्र की आरम्भिक नक्षत्र है, जो मेष के 0°–13°20′ पर स्थित है — वह बिंदु जहाँ से सायन राशिचक्र प्रत्येक वर्ष शुरू होता है। यह स्थिति अत्यंत महत्वपूर्ण प्रतीकात्मक महत्व रखती है: अश्विनी आदिम जीवन शक्ति, सृष्टि की चिंगारी और प्रारंभ करने के कच्चे साहस का प्रतिनिधित्व करती है।

'अश्विनी' नाम संस्कृत शब्द अश्व (घोड़ा) से आया है, और इसके अधिष्ठाता देवता — अश्विनी कुमार — सुनहरे घोड़ों पर स्वर्ग में सवारी करने वाले जुड़वां देव-वैद्य के रूप में चित्रित हैं। ब्रिहत पाराशर होरा शास्त्र (BPHS, अध्याय 6) के अनुसार, अश्विनी को लघु (हल्का) और क्षिप्र (तीव्र) नक्षत्र के रूप में वर्गीकृत किया गया है, जो इसे गति, यात्रा और नई शुरुआत की आवश्यकता वाली गतिविधियों के लिए शुभ बनाता है।

गुणविवरण
राशि स्थितिमेष 0°00′ – 13°20′
स्वामी ग्रहकेतु (दक्षिण नोड)
अधिष्ठाता देवताअश्विनी कुमार (दिव्य वैद्य)
प्रतीकघोड़े का सिर / घोड़े के मुखवाले जुड़वां
प्रकृतिलघु (हल्का), क्षिप्र (तीव्र)
गणदेव (दिव्य)
योनिअश्व (घोड़ा)
नाड़ीवात (वायु)
गुणतमस
जातिवैश्य
तत्वपृथ्वी
शक्तिशीघ्र व्यापनी शक्ति — त्वरित उपचार और पहुंचने की शक्ति

Ashwini Nakshatra की विशेषताएं — व्यक्तित्व और गुण

अश्विनी नक्षत्र में जन्मे जातक सहज जीवंतता से परिभाषित होते हैं: वे सोचने से पहले करते हैं, बीमारी दिखने से पहले ठीक करते हैं, और साहस जुटाने से पहले शुरुआत करते हैं। यह अग्रणी, आपातकालीन प्रतिक्रियाकर्ता और प्राकृतिक नेता की नक्षत्र है।

डॉ. बी.वी. रमण ए कैटेकिज्म ऑफ एस्ट्रोलॉजी में अश्विनी जातकों को "अच्छे रूप, मधुर स्वभाव और खेल तथा बाहरी गतिविधियों की रुचि से संपन्न — शुरुआत में त्वरित परंतु दृढ़ता में कमी हो सकती है" के रूप में वर्णित करते हैं।

मुख्य सकारात्मक गुण:

  • त्वरित निर्णय लेने और कार्य करने की क्षमता
  • प्राकृतिक साहस — अश्विनी जातक जोखिम पर कम सोचते हैं
  • उपचार की प्रवृत्ति — चिकित्सा, आपातकालीन सेवाओं और पुनर्स्थापन की ओर आकर्षण
  • दशकों तक बनी रहने वाली युवा ऊर्जा
  • व्यावहारिक रूप से लागू बुद्धि
  • गंभीर परिस्थितियों में भी हास्य और हल्कापन

मुख्य चुनौतियां:

  • अधीरता — "वह घोड़ा जो दरवाजा खुलने से पहले सरपट दौड़ना चाहता है"
  • जो शुरू किया वह पूरे जोश से खत्म करने में कठिनाई
  • सोच की गति के कारण बेबाकी जो कठोरता लग सकती है
  • एक साथ कई नई परियोजनाओं में ऊर्जा बिखेरने की प्रवृत्ति

महत्वपूर्ण: अश्विनी एक गण्डमूल नक्षत्र है। के.एन. राव ज्योतिष, नियति और समय का पहिया में बताते हैं कि गण्डमूल जन्म एक विशेष कार्मिक तीव्रता वहन करते हैं — व्यक्ति अक्सर जीवन में जल्दी एक परिभाषित संकट का सामना करता है जो असाधारण लचीलेपन को गढ़ता है।


Ashwini Nakshatra — पुरुष जातकों की विशेषताएं

अश्विनी नक्षत्र के पुरुष जातक पहले कार्य, फिर विचार की प्रवृत्ति वाले व्यक्तित्व हैं — वे सोचने के बजाय करने के माध्यम से जानकारी को समझते हैं। सामान्य अश्विनी पुरुष अपनी वास्तविक आयु से काफी युवा दिखते हैं।

मुख्य विशेषताएं:

  • व्यावसायिक शिखर आमतौर पर 30 से 55 वर्ष की आयु के बीच
  • मजबूत शारीरिक ऊर्जा — खेल, मार्शल आर्ट और शारीरिक व्यवसायों की ओर झुकाव
  • महत्वाकांक्षी लेकिन कभी-कभी असंगत — शानदार शुरुआत, बदलती-बदलती परिणति
  • निकट संबंधों में वफादारी, त्वरित क्रोध जो उतनी ही तेजी से शांत हो जाता है
  • पिता के साथ संबंध कभी-कभी जटिल; मातृ समर्थन आमतौर पर मजबूत

Ashwini Nakshatra — स्त्री जातकों की विशेषताएं

अश्विनी नक्षत्र की स्त्री जातक घोड़े की अग्रणी ऊर्जा और अश्विनी कुमारों की देखभाल करने वाली सार को एक साथ जोड़ती हैं — वे प्राकृतिक उपचारक और नेता एक साथ हैं।

मुख्य विशेषताएं:

  • उच्च कार्यकारी क्षमता — नेतृत्व भूमिकाओं में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन
  • उच्च सौंदर्य बोध — सौंदर्य, फैशन और रचनात्मक वातावरण के प्रति आकर्षण
  • विवाह का उचित समय अक्सर 23–26 वर्ष (शास्त्रीय ज्योतिष ग्रंथों के अनुसार)
  • उत्कृष्ट माताएं जो बच्चों में निर्भरता के बजाय स्वतंत्रता को प्रोत्साहित करती हैं
  • स्वास्थ्य-सचेत, प्राकृतिक उपचार प्रणालियों में रुचि रखने वाली

Ashwini Nakshatra के 4 चरण (पाद)

प्रत्येक नक्षत्र 3°20′ के चार खंडों (चरणों/पदों) में विभाजित होती है, प्रत्येक अलग नवमांश राशि में पड़ता है। अश्विनी में आपके लग्न या चंद्रमा की चरण स्थिति मूल ऊर्जा को महत्वपूर्ण रूप से संशोधित करती है।

चरणनवमांशअंशमुख्य अभिव्यक्ति
चरण 1मेष (वर्गोत्तम)0°00′–3°20′अधिकतम अग्नि — सर्वाधिक आवेगशील, अग्रणी, स्वतंत्र; केतु की शुद्ध ऊर्जा
चरण 2वृष3°20′–6°40′स्थिर, दृढ़निश्चयी, ठोस परिणाम बनाने पर केंद्रित
चरण 3मिथुन6°40′–10°00′संचारशील, जिज्ञासु, मानसिक रूप से चपल; एकसाथ कई करियर
चरण 4कर्क10°00′–13°20′सर्वाधिक भावनात्मक रूप से संवेदनशील अश्विनी; सहजज्ञ, परिवार-रक्षक

ध्यान दें: अश्विनी चरण 1 वर्गोत्तम है — राशि (D1) और नवमांश (D9) दोनों में एक ही राशि। BPHS के अनुसार, वर्गोत्तम स्थिति में ग्रह महत्वपूर्ण शक्ति और अभिव्यक्ति की शुद्धता प्राप्त करते हैं।


Ashwini Nakshatra में करियर — व्यवसाय और कौशल

अश्विनी नक्षत्र दिव्य वैद्यों और त्वरित कार्य की नक्षत्र है — करियर में सफलता उन क्षेत्रों में आती है जहाँ गति, पहल और उपचार का संगम होता है।

अश्विनी जातकों के लिए श्रेष्ठ करियर मार्ग:

  • चिकित्सा और शल्य चिकित्सा — विशेष रूप से आपातकालीन चिकित्सा, ट्रॉमा सर्जरी, सैन्य चिकित्सा
  • खेल और एथलेटिक्स — घोड़े का प्रतीक और क्षिप्र (तीव्र) प्रकृति प्राकृतिक एथलीट बनाती है
  • सैन्य और रक्षा — साहस, त्वरित निर्णय, शारीरिक दृढ़ता
  • उद्यमिता — वे उद्यम शुरू करने की क्षमता जिनसे दूसरे हिचकिचाते
  • मनोविज्ञान और परामर्श — अश्विनी कुमारों का उपचार पहलू मन पर लागू
  • परिवहन और लॉजिस्टिक्स — वाहन के रूप में घोड़ा; अश्विनी सभी तेज गति के रूपों को नियंत्रित करती है
  • घोड़े से जुड़े उद्योग — रेसिंग, प्रजनन, इक्वाइन थेरेपी

के.एस. चरक मेडिकल एस्ट्रोलॉजी की सूक्ष्मताएं में अश्विनी को चिकित्सा पेशेवरों के लिए प्राथमिक नक्षत्र बताते हैं।

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Ashwini Nakshatra की अन्य नक्षत्रों से अनुकूलता

अश्विनी की अनुकूलता भरणी और पुष्य के साथ सबसे अधिक है — और हस्त और चित्रा के साथ सबसे कठिन है। वैदिक अनुकूलता (अष्टकूट प्रणाली) में योनि मिलान सबसे महत्वपूर्ण कारकों में से एक है: अश्विनी की योनि अश्व (घोड़ा) है।

अनुकूलतानक्षत्रकारण
उत्कृष्टभरणी (हाथी)मेष में पूरक ऊर्जाएं; साझा अग्नि तत्व
उत्कृष्टपुष्य (भेड़)पुष्य की देखभाल अश्विनी की आवेगशीलता को संतुलित करती है
अच्छीअश्विनी (घोड़ा)समान नक्षत्र — उच्च समझ, कुछ प्रतिस्पर्धा
अच्छीअश्लेषा (बिल्ली)सहज संबंध; केतु-बुध अनुनाद
चुनौतीपूर्णहस्त (भैंस)योनि विरोध; हस्त की सावधानी बनाम अश्विनी की गति
चुनौतीपूर्णचित्रा (बाघ)दोनों स्वतंत्र; शक्ति संघर्ष संभव

गण अनुकूलता: अश्विनी देव गण (दिव्य स्वभाव) है। यह अन्य देव गण नक्षत्रों के साथ मेल खाती है, मनुष्य गण के साथ मध्यम अनुकूलता और राक्षस गण की नक्षत्रों के साथ महत्वपूर्ण चुनौतियां रखती है।

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Ashwini Nakshatra और गण्डमूल — क्या जानना जरूरी है?

अश्विनी छह गण्डमूल नक्षत्रों में से एक है — वैदिक ज्योतिष में एक वर्गीकरण जो एक तीव्र कार्मिक हस्ताक्षर को इंगित करता है जिसके लिए जन्म के समय विशेष ध्यान की आवश्यकता होती है।

गण्डमूल शांति क्यों करते हैं? विमशोत्तरी में ग्रहीय स्वामित्व के जंक्शन बिंदुओं (संधियों) पर स्थित होने के कारण इन नक्षत्रों में जन्म की विशेष कार्मिक तीव्रता होती है।

छह गण्डमूल नक्षत्र:

  1. अश्विनी (केतु → शुक्र संक्रमण)
  2. अश्लेषा (बुध दशा का अंत)
  3. मघा (केतु दशा की शुरुआत)
  4. ज्येष्ठा (बुध दशा का अंत)
  5. मूल (केतु दशा की शुरुआत)
  6. रेवती (बुध → केतु संक्रमण)

परंपरागत उपाय: गण्डमूल शांति पूजा जन्म के 27वें दिन (जब चंद्रमा जन्म नक्षत्र पर वापस आती है) की जाती है, और 1 साल में फिर से। यह दुर्भाग्य का संकेत नहीं — वैदिक भारत के कई महान नेता, वैद्य और कलाकार गण्डमूल नक्षत्रों में जन्मे थे।


Ashwini Nakshatra और स्वास्थ्य

अश्विनी नक्षत्र सिर के ऊपरी भाग और मस्तिष्क क्रियाओं को नियंत्रित करती है, जिससे जातक तंत्रिका स्वास्थ्य के प्रति विशेष रूप से सचेत होते हैं। वात दोष की प्रधानता ऐसी ऊर्जा बनाती है जो तीव्रता से जलती है लेकिन उतनी ही तेजी से क्षीण हो सकती है।

अश्विनी जातकों में स्वास्थ्य पैटर्न:

  • शक्ति: उच्च शारीरिक लचीलापन और बीमारी से तेज ठीक होना
  • कमजोरी: अत्यधिक परिश्रम से तंत्रिका तंत्र का तनाव, सिरदर्द, नींद में बाधा
  • मुख्य शरीर क्षेत्र: सिर, मस्तिष्क प्रांतस्था, मोटर न्यूरॉन्स
  • मौसमी संवेदनशीलता: शरद ऋतु और प्रारंभिक सर्दियों में वात बढ़ता है — इस समय सबसे अधिक देखभाल की आवश्यकता

सुझाव: नियमित शारीरिक व्यायाम (घोड़े को चलना ही चाहिए), वात को संतुलित करने के लिए प्राणायाम, और प्राकृतिक सीमाओं से परे धकेलने की जन्मजात प्रवृत्ति को नियंत्रित करने के लिए निर्धारित आराम।


अपनी कुंडली में Ashwini Nakshatra कैसे पढ़ें

कुंडली में अश्विनी का अर्थ इस बात पर निर्भर करता है कि कौन सा ग्रह इसमें बैठा है — ग्रह अपनी विशेषताएं अश्विनी की केतु-शासित, मेष-आधारित ऊर्जा के माध्यम से लाता है।

विश्लेषण के लिए मुख्य स्थितियां:

  • चंद्रमा अश्विनी में: भावनात्मक प्रकृति तेज, सहज, अग्रणी — भावनात्मक उपचार चिंतन के बजाय क्रिया से
  • लग्न (आरोही) अश्विनी में: शारीरिक जीवंतता, युवा रूप-रंग, अग्रणी सार्वजनिक व्यक्तित्व
  • सूर्य अश्विनी में: साहस और पहल के माध्यम से नेतृत्व; वीर का आदर्श
  • मंगल अश्विनी में: अत्यंत शक्तिशाली स्थिति — मंगल मेष पर राज करता है और अश्विनी ऊर्जा मार्शल ड्राइव को बढ़ाती है; एथलेटिक श्रेष्ठता
  • केतु अश्विनी में (स्वयं की नक्षत्र): उपचार या सैन्य कला में गहरी पूर्व-जन्म महारत

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मुख्य बातें: अश्विनी नक्षत्र का ज्योतिषीय महत्व

अश्विनी नक्षत्र ब्रह्मांडीय चक्र की पहली सांस का प्रतिनिधित्व करती है — वह क्षण जब ब्रह्मांड सृष्टि में सांस छोड़ता है। इसके प्रभाव में जन्मे लोग दिव्य वैद्य का उपहार लेकर आते हैं: शुरुआत करने, ठीक करने और उस गति से चलने की क्षमता जिसे अन्य राशियां जीवन भर विकसित करने की कोशिश करती हैं।

अश्विनी में अपनी स्थिति को समझना — चाहे वह चंद्रमा, लग्न, या कोई महत्वपूर्ण ग्रह हो — आपको आपके जन्मजात उपहारों (पहल, उपचार, साहस) और विकास के किनारों (शुरू की गई चीजें पूरी करना, बिना जले तात्कालिकता को दिशा देना) पर एक विशिष्ट दृष्टिकोण देता है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अश्विनी नक्षत्र क्या है?

अश्विनी नक्षत्र वैदिक ज्योतिष की 27 नक्षत्रों में पहली नक्षत्र है, जो मेष राशि के 0° से 13°20′ तक फैली है। इसके स्वामी ग्रह केतु हैं और अधिष्ठाता देवता अश्विनी कुमार (देवताओं के दिव्य वैद्य) हैं। यह नक्षत्र नई शुरुआत, उपचार और गतिशीलता का प्रतीक है।

अश्विनी नक्षत्र का स्वामी कौन है?

अश्विनी नक्षत्र का स्वामी ग्रह केतु (राहु का दक्षिण नोड) है। इस नक्षत्र में जन्मे लोगों की विमशोत्तरी दशा केतु की 7 वर्षीय महादशा से शुरू होती है, जो आध्यात्मिक वैराग्य और अचानक आने वाली अंतर्दृष्टि को जीवन की मुख्य थीम बनाती है।

क्या अश्विनी नक्षत्र गण्डमूल नक्षत्र है?

हाँ। अश्विनी छह गण्डमूल नक्षत्रों में से एक है (अश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल और रेवती के साथ)। परंपरागत ज्योतिष में इस नक्षत्र में जन्मे बच्चों के लिए जन्म के 27वें दिन गण्डमूल शांति पूजा की जाती है।

अश्विनी नक्षत्र के साथ कौन सी नक्षत्र सबसे अनुकूल है?

अश्विनी नक्षत्र भरणी नक्षत्र (मेष राशि का एक ही क्षेत्र, पूरक ऊर्जाएं) और पुष्य नक्षत्र (पुष्य की देखभाल अश्विनी की आवेगशीलता को संतुलित करती है) के साथ सबसे अधिक अनुकूल है। गण मिलान में अश्विनी देव गण है।

अश्विनी नक्षत्र में जन्मे लोगों के लिए कौन सा करियर उपयुक्त है?

अश्विनी नक्षत्र वाले चिकित्सा, शल्य चिकित्सा, खेल, सैन्य सेवा, आपातकालीन सेवाओं और उद्यमिता में उत्कृष्ट होते हैं। अश्विनी कुमार दिव्य वैद्य हैं — इसलिए उपचार, गति और त्वरित निर्णय लेने से जुड़े करियर इस नक्षत्र के लिए स्वाभाविक रूप से उपयुक्त हैं।

अश्विनी नक्षत्र के 4 चरण कौन से हैं?

चरण 1 (मेष नवमांश, 0°–3°20′): सर्वाधिक ऊर्जावान, आवेगशील, स्वतंत्र। चरण 2 (वृष, 3°20′–6°40′): दृढ़निश्चयी, व्यावहारिक। चरण 3 (मिथुन, 6°40′–10°): संचारशील, जिज्ञासु। चरण 4 (कर्क, 10°–13°20′): सबसे अधिक भावनात्मक रूप से संवेदनशील, सहजज्ञ।

अश्विनी नक्षत्र का प्रतीक क्या है?

अश्विनी नक्षत्र का प्रतीक घोड़े का सिर (या दो घोड़ों के मुखवाले देवता) है। घोड़ा गति, जीवन शक्ति (प्राण), जीवंतता और अग्रणी भावना का प्रतीक है। अश्विनी कुमार सोने के घोड़ों पर सवार थे और ब्रह्मांड के सबसे तेज प्राणी माने जाते हैं।

मैं कैसे जानूं कि मेरी चंद्रमा अश्विनी नक्षत्र में है?

यदि आपकी चंद्रमा मेष राशि के 0°00′ से 13°20′ (सायन/वैदिक ज्योतिष) के बीच है, तो आप अश्विनी चंद्र के जातक हैं। StarMeet कुंडली कैलकुलेटर में अपनी सटीक जन्मतिथि, समय और स्थान डालकर अपनी चंद्र नक्षत्र और पूरी कुंडली जांचें।

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